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योगीराज श्री वेथथिरी महर्षि [Vethathiri Maharishi]

Post by: 26/10/2017 0 comments 133 views

सामान्य परिचय

योगीराज श्री वेथथिरी महर्षि [Vethathiri Maharishi] (१४ अगस्त १९११ – २८ मार्च २००६) जो कि चैन्नई में विश्व समुदाय केंद्र (१९५८) के संस्थापक और ट्रस्टी होने के साथ साथ विश्व समुदाय के एक आध्यात्मिक नेता, विश्व शांति कार्यकर्ता, वैज्ञानिक, दार्शनिक, सिद्ध, आयुर्वेदिक,होम्योपैथिक व्यवसायी थे | बिग बैंग थ्योरी के लिए एक विकल्प के रूप में यूनिवर्सल मेग्निटिज्म का सिद्धांत उनका दिया हुआ है | उनका ये सिद्धांत ब्रह्माण्ड के गठन को और अधिक सामान्य तरीके से दिखाता है जिसमें कुछ चीजें एक बैंग के साथ होती है | उनका ये सिद्धांत परमाणुओं का विकास प्रदान करता है | उन्होंने विश्व शांति के लिए १४ सिद्धांतो का प्रतिपादन किया तथा साथ ही सयुंक्त राष्ट्र में एक ब्लू प्रिंट प्रस्तुत किया |

उन्होंने दुनिया में ३०० से अधिक योग केंद्रों की स्थापना की और लगभग ८० पुस्तकें लिखीं, जिनमें से कई को शैक्षिक पाठ्यपुतस्कों के रूप में अपना लिया गया है | द्रविड़ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें १९ वी सिद्ध घोषित किया गया था और हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने उनके सरलीकृत कुंडलिनी योग को स्कूलों में पढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी है |

जीवनी

जन्म

श्री वेथथिरी महर्षि का जन्म १४ अगस्त १९११ को चेन्नई के दक्षिण गुदुवंन्चेरी गांव में, एक स्वदेशी विवर परिवार में हुआ था |

प्रारंभिक जीवन

कई छोटी नौकरियों में कई साल बीताने के बाद उन्होंने एक कपड़ा मील की स्थापना जिसको लाभ साझाकरण के आधार पर २००० से अधिक श्रमिकों को रोजगार देने क लिए बढ़ाया गया |महर्षि ने नियमित रूप से गहन ध्यान और आत्मनिरीक्षण में भाग लिया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें ३५ वर्ष की आयु में पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ | ५० वर्ष की आयु में महर्षि ने अपने सारे व्यावसायिक उपक्रम बंद किये और अपना सम्पूर्ण जीवन आध्यात्मिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया | आध्यात्मिक सेवा के लिए उन्होंने अपने परिवार से सम्बन्ध खत्म नहीं किये अर्थात वें गृहस्थ जीवन में बने रहते हुए ही आध्यात्मिक सेवा में लगे रहें |

कविताएं और किताबें

श्री वेथथिरी महर्षि का भारतीय दार्शनिक परंपरा में दर्शन अद्वेत था और उन्होंने दार्शनिक विषयों पर ३००० से अधिक कविताएं लिखी | संस्कृत में द्वैतवाद का अर्थ “२ ” तथा विज्ञापन का कोई अर्थ नहीं हैं तथा ये केवल यही बताता है कि भगवान एक हैं | इसे पैंथिस्टीक मोनिसम कहा जा सकता हैं | उनकी भाषा और व्यवहार समकालीन, गैर- साम्प्रदायिक व गैर- कट्टरपंथी हैं, वें अपने जीवन के अंतिम समय तक लिखते रहे तथा उनके द्वारा तमिल और अंग्रेजी में लगभग ८० पुस्तकें लिखीं गई |

आध्यात्मिक शिक्षाएं

श्री वेथथिरी महर्षि तीन सवालों के जवाब खोजने के लिए निकले – “भगवान क्या हैं ?” “जीवन क्या हैं ?” “दुनिया में गरीबी क्यों हैं ?” इन सवालों के जवाब को ढूंढने के और अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने वें विभिन्न क्षेत्रों में गए और वहां उन्हें स्वदेशी चिकित्सा, सिद्ध आयुर्वेद और होयोपैथी के योग्य प्रमाणित व्यापारियों में शामिल किया गया। वेथथिरी महर्षि ने गृहस्थ जीवन का नेतृत्व तब तक किया जब तक की वो ५० वर्ष का ना हो जाये, और उसके पश्चात् अपने दैवीय अनुभवों को पढ़ाने और लिखने के लिए अपने जीवन को एक व्यवसायी के रूप में बदल दिया तथा अंग्रेजी और तमिल में कई किताबें प्रकाशित की | १९७२ से १९९३ के बीच वेथथिरी महर्षि के द्वारा अमेरिका, यूरोप, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान तथा मेक्सिको का दौरा किया गया |

वेथथिरी का जीवन विज्ञान (वीठाथीरियम)

वेथथिरी महर्षि ने मानवता के सुधार के लिए और जीवित रहने के सम्पूर्ण विज्ञान के रूप में सरलीकृत कुंडलिनी योग-ध्यान, शारीरिक व्यायाम, काया कल्प योग, और और आत्मनिरीक्षण का मार्ग बताया, वेथथिरी के जीवन काल का यह समय विथथीरीयम के नाम से जाना जाता हैं जो की ज्ञान रूपी पहाड़ का एक आराधनालय के तौर पर अनुवाद करता हैं | उन्होंने दावा किया कि प्रकृति के नियम के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रकृति की गहरी समझ आवश्यक हैं, जबकि आध्यात्मिक प्रगति के साथ भौतिकता का संतुलन बना रहना चाहिए |

वेथथिरी महर्षि की बतायी हुई ब्रह्मांड की प्रारंभिक अवस्था जिसे उन्होंने निरपेक्ष अंतरिक्ष कहा में दो अव्यक्त गुण अंतर्निहित हैं :

  • फोर्स या ग्रेविटी: ये अतुल्य आत्म-संकीर्ण बल हैं, जो सभी जगह कार्य करता है और सभी बलों का स्रोत हैं |
  • चेतना: सभी चीजों में कार्य का सर्वज्ञानी आदेश होता हैं, स्वामी जी के अनुसार पूर्ण स्थान के स्व-संकुचित प्रकृति के परिणामस्वरूप मौलिक ऊर्जा कण जो की अंतरिक्ष की एक अन्तर्ग्रानिक मात्रा हैं एक चक्राकार गति से शुरू होती हैं | उनका मानना था कि कताई कार्यवाही एक बाहरी शक्ति को प्रेरित करती हैं, और इसको दो बलों के आकर्षक और प्रतिकारक सह-जुड़ने को यूनिवर्सल चुंबकत्व के रूप में परिभाषित किया गया हैं | आंध्रा द्रविड़ विश्वविद्यालय ने उन्हें १९ वें सिद्ध पुरस्कार से सम्मानित किया हैं |

संगठन

१९५८ में वेथथिरी महर्षि ने एक गैर-लाभकारी पंजीकृत समाज विश्व समुदाय सेवा केंद्र (डब्लू यु सी एस सी) की स्थापना की जो की विश्व शांति के लिए कार्य करने वाली एक संस्था थी | आज २०० से ज्यादा ट्रस्ट और लगभग २००० से अधिक ध्यान केंद्र भारत में डब्लू यु सी एस सी से संबद्ध हैं | १९७२ से १९९३ के बीच महर्षि ने जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, और अमेरिका (यु.एस. ए.) की यात्रा की और बड़े पैमाने पर अध्ययन और व्याख्यान किया |

१९८४ में अल्लियर, पोलाची, तमिलनाडु में स्थित ” वीठाथिरी महर्षि योग और काया कल्प रिसर्च फाऊंडेशन” की स्थापना अत्रिरुनजोत्थी नगर के नाम पर की, यह पोलाची- वालपराई राजमार्ग ७८ पर स्थित है जो के अजिययार बांध के पास हैं और राज्य-परिवहन बसें पोलाची से अरुपरुनजोत्थी नगर तक उपलब्ध हैं | बड़ी संख्या में लम्बी अवधि के लिए SKY पाठ्यक्रम और रहने के लिए जाने वाले लोगों को सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती है, चेतना का मंदिर परिसर का केन्द्रस्थ हैं |

१९९८ में विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों को एक साथ लाने, मानव जाति का सामना करने वाले मुद्दों पर चर्चा करने और व्यक्तियों और दुनिया में बड़े पैमाने पर शांति और सामंजस्य के लिए ब्रेन ट्रस्ट (Brain Trust) स्थापित किया गया |

२८ मई २००६ को वेथाथिरी महर्षि की मृत्यु हो गई और उनका मृत शरीर विश्व कम्युनिटी सेवा केंद्र के मणि मंडपम में रखा गया हैं, जो के अरुत्रपुंजोजी नगर, अजीययार, पोलाची में स्थित हैं |

वेथथिरी महर्षि पर जारी किये गए स्टाम्प

पूर्व केंद्रीय संचार एवं सुचना प्रौद्योगिकी मंत्री ऐ.राजा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि से महर्षि वीथथिरी के स्मारक पर जारी किये गए एक डाक टिकट को प्राप्त करते हुए कहा था कि प्रसिद्ध व्यक्तियों और स्वतंत्रता सेनानियों के शताब्दी समारोह और उन पर जारी किये गए डाक टिकट युवाओं में ऐसे व्यक्तित्व को जन्म देने और उनको उनके द्वारा किये गए कार्यो और उनके दिए हुए संदेशो को अपनाने और उन संदेशो का अनुकरण करने के लिए मदद करेंगे|

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान कहा कि वीथथिरी महर्षि (१९११-२००६) की शिक्षाओं से एक प्रकार की प्रशंसा प्राप्त होती हैं, क्योंकि आध्यात्मिक नेता ने “बुद्धिवाद के हथियार” के अधीन में रहकर कार्य किया, दावा किया जाता हैं कि वें ईश्वर के संपर्क में थे लेकिन फिर भी उन्होंने लोगों को आकर्षित करने के लिए किसी प्रकार की जादुई शक्ति का प्रयोग नहीं किया | जैसे की उनकी तर्कसंगतता थी जो लोगों को खुद ही यह समझने में और महसूस करने में मदद करेगी की उनकी शिक्षाए और सन्देश आज भी बहुत अच्छे हैं |

करूणानिधि ने कहा कि, श्री रामलिंगा स्वामिगल (१८२३-१८७४) और महर्षि वेथथिरी लोगों पर पड़े हुए अंधविश्वास के प्रभाव के प्रति जागरूक थे और उन्होंने लोगों को सही रास्ते दिखाने के संघर्ष भी किया |

एन. महालिंगम, चेतना मंदिर अल्यिर के अध्यक्ष ने महर्षि के साथ अपने रिश्तों को याद करते हुए कहा कि आध्यात्मिक नेता द्वारा स्थापित विश्व समुदाय सेवा केंद्र, अडिगल के सत्य ज्ञान सबाई का नतीजा था |

credit- wikipedia

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Naveen

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